Budget! शराब महंगी, इलाज सस्ता – सरकार का ‘सेहत First’ फॉर्मूला

गौरव त्रिपाठी
गौरव त्रिपाठी

संसद में पेश हुए Union Budget 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार 9वीं बार बजट पेश कर इतिहास दोहराया। इस बार बजट का मूड साफ था— नशा महंगा, इलाज सस्ता।

यानि अगर आप जाम उठाते हैं तो जेब ढीली होगी, और अगर अस्पताल जाते हैं तो राहत मिलेगी।

शराब हुई महंगी, ‘शौकीनों’ को झटका

बजट 2026 में शराब पर टैक्स बढ़ाकर सरकार ने साफ संदेश दे दिया है— “Drink less, think more.”

शराब के दाम बढ़ने से राज्यों की कमाई तो बढ़ेगी, लेकिन आम उपभोक्ता को अब हर पैग पर बजट याद आएगा। सोशल मीडिया पर इसे लेकर तंज भी शुरू हो गया है— “Budget sober है, जनता hangover में!”

कैंसर और शुगर की दवाएं सस्ती, मरीजों को राहत

जहां शराब महंगी हुई, वहीं सेहत के मोर्चे पर सरकार ने बड़ा दिल दिखाया। वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि 17 जरूरी दवाओं पर Basic Customs Duty पूरी तरह हटाई जाएगी। कैंसर, शुगर और गंभीर बीमारियों की दवाएं सस्ती होंगी। 7 दुर्लभ बीमारियों को भी टैक्स छूट की लिस्ट में शामिल किया गया।

मतलब इलाज अब कम दर्दनाक… कम से कम बिल के मामले में।

‘इलाज टैक्स-फ्री’ की सोच

निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में कहा कि मरीजों, खासकर कैंसर पीड़ितों को राहत देना सरकार की प्राथमिकता है। अब स्पेशल मेडिकल फूड, लाइफ-सेविंग ड्रग्स और जरूरी मेडिसिन्स के व्यक्तिगत आयात पर भी टैक्स नहीं लगेगा।

सियासी भाषा में कहें तो— वोट बैंक नहीं, अब हेल्थ बैंक मजबूत करने की कोशिश।

लेदर शूज़ भी हुए सस्ते

बजट का बोनस पॉइंट— लेदर के जूते भी सस्ते किए गए हैं। यानी अस्पताल से बाहर निकलते वक्त नई चप्पल खरीदने में अब कम खर्च आएगा।

Bottom Line: Budget का Message Clear है

  • शराब = महंगी
  •  दवाएं = सस्ती
  •  हेल्थ = Priority
  •  Luxury = Costly

सरकार का इशारा साफ है— बीमारी पर खर्च कम करो, बुरी आदतों पर नहीं।

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